राजस्थान में फिर सियासी हलचल, अजमेर दरगाह में शिवलिंग होने का दावा महाराणा प्रताप सेना ने जिला न्यायालय में याचिका दायर करने का किया ऐलान
अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने दावा किया है कि दरगाह परिसर में शिवलिंग विद्यमान है और इसकी निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए। इस संबंध में उन्होंने अजमेर जिला न्यायालय में याचिका दायर करने का ऐलान किया है।
यह दावा 12 जनवरी को अजमेर के सर्किट हाउस में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान किया गया। प्रेस वार्ता में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एपी सिंह भी मौजूद रहे।
वैज्ञानिक जांच से सामने आ सकते हैं प्रमाण
डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने कहा कि उनके पास ऐसे ऐतिहासिक और दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हैं, जिनके आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि अजमेर दरगाह परिसर में शिवलिंग स्थापित है। उनका कहना है कि यदि न्यायालय के आदेश पर वैज्ञानिक जांच अथवा खुदाई कराई जाती है तो इसके स्पष्ट प्रमाण सामने आ सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं, जहां आक्रांताओं द्वारा मंदिरों पर कब्जा कर मजारों और मस्जिदों का निर्माण कराया गया। डॉ. परमार के अनुसार अजमेर दरगाह का मामला भी उसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है।
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को लिख चुके हैं पत्र
महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि वह इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखते आ रहे हैं। पत्रों के माध्यम से उन्होंने अजमेर दरगाह की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच की मांग की है, लेकिन अब तक किसी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्होंने न्यायपालिका का सहारा लेने का निर्णय लिया है।
उन्होंने अजमेर स्थित ऐतिहासिक स्थल अढ़ाई दिन के झोपड़े का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी ऐतिहासिक तथ्यों और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर जांच की आवश्यकता है।
याचिका विधिसम्मत तरीके से होगी दायर: एपी सिंह
प्रेस वार्ता के दौरान सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एपी सिंह ने कहा कि अजमेर जिला न्यायालय में याचिका पूरी तरह विधिसम्मत तरीके से दायर की जाएगी। उन्होंने बताया कि न्यायालय से तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर उचित आदेश पारित करने का आग्रह किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरा मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ाया जाएगा।
शांति बनाए रखने की अपील
डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने इस पूरे मामले में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और अदालत का जो भी निर्णय होगा, उसे स्वीकार किया जाएगा।
फिलहाल, अजमेर दरगाह से जुड़े इस नए दावे के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजरें जिला न्यायालय में दायर होने वाली याचिका और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।
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रिपोर्ट – [News daily hindi]
सम्पादक: मोहम्मद रज़ा

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